भारतीय क्रिकेट की सुनहरी यादें मैच में 183 रन बनाकर वर्ल्‍ड चैंपियन बनी थी टीम इंडिया

इंग्‍लैंड में आयोजित पहले तीन वर्ल्‍डकप 60-60 ओवर के हुए. पहले दो वर्ल्‍डकप में चैंपियन बनी वेस्‍टइंडीज टीम 1983 में एक बार फिर फाइनल में थी और उनका मुकाबला बेहद कमजोर मानी जा रही भारतीय टीम से था. उस दौर की इंडीज टीम के खेल कौशल का लोहा पूरी दुनिया मानती थी. हर किसी को यही उम्‍मीद थी कि क्‍लाइव लॉयड, विव रिचर्ड्स, गॉर्डन ग्रीनिज, जोएल गार्नर, एंडी राबर्ट्स और माइकल होल्डिंग जैसे नामी सितारों के आगे भारतीय टीम जरा भी नहीं टिक पाएंगी. माना जा रहा था कि वेस्‍टइंडीज की वर्ल्‍डकप जीत की हैट्रिक पूरी होने में महज औपचारिकता ही बाकी है. लेकिन कपिल देव की टीम ने कमाल करते हुए फाइनल में जीत हासिल कर इस बात को साबित कर दिया था कि किसी भी मैच के पूरा होने के पहले इसके परिणाम का अनुमान लगाना कितना खतरनाक है.

मैच में पहले बैटिंग करते हुए भारतीय टीम 54.4 ओवर में 183 रन बनाकर आउट हो गई थी. के.श्रीकांत ने सर्वाधिक 36 रन बनाए थे. मोहिंदर अमरनाथ ने  26 और संदीप पाटिल ने 27 रनों का योगदान दिया था. वेस्‍टइंडीज के तेज गेंदबाजों की चौकड़ी के आगे पूरे समय भारतीय बल्‍लेबाज संघर्ष करते रहे थे. एंडी रॉबर्ट्स ने तीन ओर मैल्‍कम मार्शल, माइकल होल्डिंग और लैरी गोम्‍स ने दो-दो विकेट लिए थे. ऐसा लग रहा था कि इंडीज टीम 184 रन के लक्ष्‍य को हासिल कर लेगी. ग्रीनिज के रूप में इंडीज का पहला विकेट तो जल्‍दी गिर गया लेकिन दूसरे विकेट के लिए डेसमंड हैंस ने विव रिचर्ड्स के साथ आननफानन में 49 रन की साझेदारी कर डाली.
रिचर्ड्स उस समय धमाकेदार शॉट लगा रहे थे और लग रहा था कि वे शायद मैच को 30- ओवर में ही खत्‍म कर देंगे. इसी दौरान रिचर्ड्स (33रन, 28 गेंद, सात चौके) ने मदनलाल की गेंद पर आसमानी शॉट लगाया और कपिल ने पीछे की ओर दौड़ लगाकर उन्‍हें कैच कर दिया. इस यादगार कैच से विव की पारी खत्‍म हुई. टीम इंडिया को शायद इसी विकेट की तलाश थी. 50 के स्‍कोर पर दूसरा विकेट गिरते ही टीम इंडिया का मनोबल सातवें आसमान पर था. लैरी गोम्‍स, क्‍लाइव लॉयड, फाउद बखस और जैफ डुजोन जैसे बल्‍लेबाज नहीं चले. देखते ही देखते पूरी टीम 52 ओवर में 140 रन बनाकर पैवेलियन लौट गई. भारतीय टीम ने 43 रन से मैच जीतकर इतिहास रच दिया. कपिल देव की कप्‍तानी की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही थी और वेस्‍टइंडीज का वर्ल्‍डकप खिताब की हैट्रिक का सपना टूट चुका था. भारतीय टीम के लिए मदनलाल और मोहिंदर अमरनाथ ने तीन-तीन विकेट लिए. बलविंदर संधु के खाते में दो विकेट आए. गेंद और बल्‍ले से अच्‍छा प्रदर्शन करने वाले मोहिंदर मैन ऑफ द मैच रहे थे.

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